Deuteronomy · बाइबल (हिन्दी)

Deuteronomy 33

1जो आशीर्वाद परमेश्वर के जन + 33:1 परमेश्वर के जन: परमेश्वर का जन पुराने नियम में उस मनुष्य को कहा जाता था जिसे अपरोक्ष प्रकाशन प्राप्त होता था। आवश्यक नहीं कि वह भविष्यद्वक्ता हो। मूसा ने अपनी मृत्यु से पहले इस्राएलियों को दिया वह यह है।

2उसने कहा, 1 “यहोवा सीनै से आया, और सेईर से उनके लिये उदय हुआ; 1 उसने पारान पर्वत पर से अपना तेज दिखाया, 1 और लाखों पवित्रों के मध्य में से आया, 1 उसके दाहिने हाथ से उनके लिये ज्वालामय विधियाँ निकलीं। (यूह. 1:4) 1

3वह निश्चय लोगों से प्रेम करता है; 1 उसके सब पवित्र लोग तेरे हाथ में हैं; 1 वे तेरे पाँवों के पास बैठे रहते हैं, 1 एक-एक तेरे वचनों से लाभ उठाता है। (इफि. 1:8) 1

4मूसा ने हमें व्यवस्था दी, और वह याकूब की मण्डली का निज भाग ठहरी। 1

5जब प्रजा के मुख्य-मुख्य पुरुष, और इस्राएल के सभी गोत्र एक संग होकर एकत्रित हुए, 1 तब वह यशूरून में राजा ठहरा। 1 रूबेन को आशीर्वाद

6“रूबेन न मरे, वरन् जीवित रहे, तो भी उसके यहाँ के मनुष्य थोड़े हों।” 1 यहूदा को आशीर्वाद

7और यहूदा पर यह आशीर्वाद हुआ जो मूसा ने कहा, 1 “हे यहोवा तू यहूदा की सुन, 1 और उसे उसके लोगों के पास पहुँचा + 33:7 लोगों के पास पहुँचा: याकूब की प्रतिज्ञा को ध्यान में रखकर मूसा प्रार्थना करता है कि यहूदा जो सब गोत्रों से आगे चलता था, वह सदैव विजयी होकर सुरक्षित घर लौटे। हाथ का अर्थ है कि इस काम को पूरा करने में परमेश्वर सहायता करें। । 1 वह अपने लिये आप अपने हाथों से लड़ा, 1 और तू ही उसके द्रोहियों के विरुद्ध उसका सहायक हो।” 1 लेवी को आशीर्वाद

8फिर लेवी के विषय में उसने कहा, 1 “तेरे तुम्मीम और ऊरीम तेरे भक्त के पास हैं, जिसको तूने मस्सा में परख लिया, 1 और जिसके साथ मरीबा नामक सोते पर तेरा वाद-विवाद हुआ; 1

9उसने तो अपने माता-पिता के विषय में कहा, ‘मैं उनको नहीं जानता;’ 1 और न तो उसने अपने भाइयों को अपना माना, और न अपने पुत्रों को पहचाना। 1 क्योंकि उन्होंने तेरी बातें मानीं, और वे तेरी वाचा का पालन करते हैं। (मत्ती 10:37) 1

10वे याकूब को तेरे नियम, और इस्राएल को तेरी व्यवस्था सिखाएँगे; 1 और तेरे आगे धूप और तेरी वेदी पर सर्वांग पशु को होमबलि करेंगे। 1

11हे यहोवा, उसकी सम्पत्ति पर आशीष दे, और उसके हाथों की सेवा को ग्रहण कर; 1 उसके विरोधियों और बैरियों की कमर पर ऐसा मार, कि वे फिर न उठ सके।” 1 बिन्यामीन को आशीर्वाद

12फिर उसने बिन्यामीन के विषय में कहा, 1 “यहोवा का वह प्रिय जन, उसके पास निडर वास करेगा; 1 और वह दिन भर उस पर छाया करेगा, 1 और वह उसके कंधों के बीच रहा करता है + 33:12 वह उसके कंधों के बीच रहा करता है: परमेश्वर से ऐसा सहयोग पाएगा जैसे एक पुत्र पिता के कंधों पर उठाया जाता है।।” (2 थिस्स. 2:13) 1 यूसुफ को आशीर्वाद

13फिर यूसुफ के विषय में उसने कहा; 1 “इसका देश यहोवा से आशीष पाए 1 अर्थात् आकाश के अनमोल पदार्थ और ओस, 1 और वह गहरा जल जो नीचे है, 1

14और सूर्य के पकाए हुए अनमोल फल, 1 और जो अनमोल पदार्थ मौसम के उगाए उगते हैं, 1

15और प्राचीन पहाड़ों के उत्तम पदार्थ, 1 और सनातन पहाड़ियों के अनमोल पदार्थ, 1

16और पृथ्वी और जो अनमोल पदार्थ उसमें भरें हैं, 1 और जो झाड़ी में रहता था उसकी प्रसन्नता। 1 इन सभी के विषय में यूसुफ के सिर पर, 1 अर्थात् उसी के सिर के चाँद पर जो अपने भाइयों से अलग हुआ था आशीष ही आशीष फले। 1

17वह प्रतापी है, मानो गाय का पहलौठा है, और उसके सींग जंगली बैल के से हैं; 1 उनसे वह देश-देश के लोगों को, वरन् पृथ्वी के छोर तक के सब मनुष्यों को ढकेलेगा; 1 वे एप्रैम के लाखों-लाख, और मनश्शे के हजारों-हजार हैं।” 1 जबूलून और इस्साकार को आशीर्वाद

18फिर जबूलून के विषय में उसने कहा, 1 “हे जबूलून, तू बाहर निकलते समय, 1 और हे इस्साकार, तू अपने डेरों में आनन्द करे। 1

19वे देश-देश के लोगों को पहाड़ पर बुलाएँगे; 1 वे वहाँ धर्मयज्ञ करेंगे; 1 क्योंकि वे समुद्र का धन, 1 और रेत में छिपे हुए अनमोल पदार्थ से लाभ उठाएँगे।” 1 गाद को आशीर्वाद

20फिर गाद के विषय में उसने कहा, 1 “धन्य वह है जो गाद को बढ़ाता है! 1 गाद तो सिंहनी के समान रहता है, 1 और बाँह को, वरन् सिर के चाँद तक को फाड़ डालता है। 1

21और उसने पहला अंश तो अपने लिये चुन लिया, 1 क्योंकि वहाँ सरदार के योग्य भाग रखा हुआ था; 1 तब उसने प्रजा के मुख्य-मुख्य पुरुषों के संग आकर यहोवा का ठहराया हुआ धर्म, 1 और इस्राएल के साथ होकर उसके नियम का प्रतिपालन किया।” 1 दान को आशीर्वाद

22फिर दान के विषय में उसने कहा, 1 “दान तो बाशान से कूदनेवाला सिंह का बच्चा है।” 1 नप्ताली को आशीर्वाद

23फिर नप्ताली के विषय में उसने कहा, 1 “हे नप्ताली, तू जो यहोवा की प्रसन्नता से तृप्त, 1 और उसकी आशीष से भरपूर है, 1 तू पश्चिम और दक्षिण के देश का अधिकारी हो।” 1 आशेर को आशीर्वाद

24फिर आशेर के विषय में उसने कहा, 1 “आशेर पुत्रों के विषय में आशीष पाए; 1 वह अपने भाइयों में प्रिय रहे, 1 और अपना पाँव तेल में डुबोए। 1

25तेरे जूते लोहे और पीतल के होंगे, 1 और जैसे तेरे दिन वैसी ही तेरी शक्ति हो। 1 मूसा द्वारा परमेश्वर की स्तुति 1

26“हे यशूरून, परमेश्वर के तुल्य और कोई नहीं है, 1 वह तेरी सहायता करने को आकाश पर, 1 और अपना प्रताप दिखाता हुआ 1 आकाशमण्डल पर सवार होकर चलता है। 1

27अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, 1 और नीचे सनातन भुजाएँ हैं। 1 वह शत्रुओं को तेरे सामने से निकाल देता, 1 और कहता है, उनको सत्यानाश कर दे। 1

28और इस्राएल निडर बसा रहता है, 1 अन्न और नये दाखमधु के देश में याकूब का सोता अकेला ही रहता है; 1 और उसके ऊपर के आकाश से ओस पड़ा करती है। 1

29हे इस्राएल, तू क्या ही धन्य है! 1 हे यहोवा से उद्धार पाई हुई प्रजा, तेरे तुल्य कौन है? 1 वह तो तेरी सहायता के लिये ढाल, 1 और तेरे प्रताप के लिये तलवार है; 1 तेरे शत्रु तुझे सराहेंगे, 1 और तू उनके ऊँचे स्थानों को रौंदेगा।”

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