Hebrews 1
1पूर्व युग में परमेश्वर ने पूर्वजों से थोड़ा-थोड़ा करके और भाँति-भाँति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें की,
2पर इन अन्तिम दिनों में हम से अपने पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्टि भी रची है। (1 कुरि. 8:6, यूह. 1:3)
3वह उसकी महिमा का प्रकाश, और उसके तत्व की छाप है, और सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ्य के वचन से सम्भालता है: वह पापों को धोकर ऊँचे स्थानों पर महामहिमन् के दाहिने जा बैठा।
4और स्वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा + 1:4 स्वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा: स्वर्गदूतों और अधिकारियों और शक्तियों को उनके वश में कर दिया गया और उसके ऊपर बहुत ऊँचा किया गया।, जितना उसने उनसे बड़े पद का वारिस होकर उत्तम नाम पाया। 1 यीशु स्वर्गदूतों से श्रेष्ठ
5क्योंकि स्वर्गदूतों में से उसने कब किसी से कहा, 1 “तू मेरा पुत्र है; 1 आज मैं ही ने तुझे जन्माया है?” 1 और फिर यह, 1 “मैं उसका पिता होऊँगा, 1 और वह मेरा पुत्र होगा?” (2 शमू. 7:14, 1 इति. 17:13, भज. 2:7)
6और जब पहलौठे को जगत में फिर लाता है, तो कहता है, “परमेश्वर के सब स्वर्गदूत उसे दण्डवत् करें।” (व्यव. 32:43, 1 पत. 3:22)
7और स्वर्गदूतों के विषय में यह कहता है, 1 “वह अपने दूतों को पवन, 1 और अपने सेवकों को धधकती आग बनाता है।” (भज. 104:4)
8परन्तु पुत्र के विषय में कहता है, 1 “हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा, 1 तेरे राज्य का राजदण्ड न्याय का राजदण्ड है। 1
9तूने धार्मिकता से प्रेम और अधर्म से बैर रखा; 1 इस कारण परमेश्वर, तेरे परमेश्वर, ने 1 तेरे साथियों से बढ़कर हर्षरूपी तेल से तेरा अभिषेक किया।” (भज. 45:7) 1
10और यह कि, “हे प्रभु, आदि में तूने पृथ्वी की नींव डाली, 1 और स्वर्ग तेरे हाथों की कारीगरी है। (भज. 102:25, उत्प. 1:1) 1
11वे तो नाश हो जाएँगे + 1:11 वे तो नाश हो जाएँगे: अर्थात्, आकाश और पृथ्वी। वे समाप्त हो जाएँगे; या वे नष्ट किया जाएगा।; परन्तु तू बना रहेगा और 1 वे सब वस्त्र के समान पुराने हो जाएँगे। 1
12और तू उन्हें चादर के समान लपेटेगा, 1 और वे वस्त्र के समान बदल जाएँगे: 1 पर तू वही है 1 और तेरे वर्षों का अन्त न होगा।” (इब्रा. 13:8, भज. 102:25,26) 1
13और स्वर्गदूतों में से उसने किस से कब कहा, 1 “तू मेरे दाहिने बैठ, 1 जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवों के नीचे की चौकी न कर दूँ?” (मत्ती 22:44, भज. 110:1)
14क्या वे सब परमेश्वर की सेवा टहल करनेवाली आत्माएँ नहीं; जो उद्धार पानेवालों के लिये सेवा करने को भेजी जाती हैं? (भज. 103:20,21)