Song of Solomon · बाइबल (हिन्दी)

Song of Solomon 5

1हे मेरी बहन, हे मेरी दुल्हन, 1 मैं अपनी बारी में आया हूँ, 1 मैंने अपना गन्धरस और बलसान चुन लिया; 1 मैंने मधु समेत छत्ता + 5:1 छत्ता: जिसमें शहद होता है या उसका एक अंश खा लिया, 1 मैंने दूध और दाखमधु पी लिया। सहेलियाँ 1 हे मित्रों, तुम भी खाओ, 1 हे प्यारों, पियो, मनमाना पियो! 1 चौथा गीत वधू 1

2मैं सोती थी, परन्तु मेरा मन जागता था। 1 सुन! मेरा प्रेमी खटखटाता है, और कहता है, 1 “हे मेरी बहन, हे मेरी प्रिय, हे मेरी कबूतरी, 1 हे मेरी निर्मल, मेरे लिये द्वार खोल; 1 क्योंकि मेरा सिर ओस से भरा है, 1 और मेरी लटें रात में गिरी हुई बूँदों से भीगी हैं।” (प्रका. 3:20) 1

3मैं अपना वस्त्र उतार चुकी थी मैं उसे फिर कैसे पहनूँ? 1 मैं तो अपने पाँव धो चुकी थी अब उनको कैसे मैला करूँ? 1

4मेरे प्रेमी ने अपना हाथ किवाड़ के छेद से भीतर डाल दिया, 1 तब मेरा हृदय उसके लिये उमड़ उठा। 1

5मैं अपने प्रेमी के लिये द्वार खोलने को उठी, 1 और मेरे हाथों से गन्धरस टपका, 1 और मेरी अंगुलियों पर से टपकता हुआ गन्धरस बेंड़े की मूठों पर पड़ा। 1

6मैंने अपने प्रेमी के लिये द्वार तो खोला 1 परन्तु मेरा प्रेमी मुड़कर चला गया था। 1 जब वह बोल रहा था, तब मेरा प्राण घबरा गया था 1 मैंने उसको ढूँढ़ा, परन्तु न पाया; 1 मैंने उसको पुकारा, परन्तु उसने कुछ उत्तर न दिया। 1

7पहरेदार जो नगर में घूमते थे, मुझे मिले, 1 उन्होंने मुझे मारा और घायल किया; 1 शहरपनाह के पहरुओं ने मेरी चद्दर मुझसे छीन ली। 1

8हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराकर कहती हूँ, यदि मेरा प्रेमी तुम को मिल जाए, 1 तो उससे कह देना कि मैं प्रेम में रोगी हूँ + 5:8 मैं प्रेम में रोगी हूँ: वधू अब जाग चुकी है और अपने प्रीतम को खोज रही है। उसके चले जाने का उसका स्वप्न और उससे उत्पन्न उसकी भावनाएँ उसके जागृत मन की वास्तविक भावनाओं को दर्शाती हैं। । सहेलियाँ 1

9हे स्त्रियों में परम सुन्दरी 1 तेरा प्रेमी और प्रेमियों से किस बात में उत्तम है? 1 तू क्यों हमको ऐसी शपथ धराती है? वधू 1

10मेरा प्रेमी गोरा और लाल सा है, 1 वह दस हजारों में उत्तम है। 1

11उसका सिर उत्तम कुन्दन है; 1 उसकी लटकती हुई लटें कौवों की समान काली हैं। 1

12उसकी आँखें उन कबूतरों के समान हैं जो 1 दूध में नहाकर नदी के किनारे 1 अपने झुण्ड में एक कतार से बैठे हुए हों। 1

13उसके गाल फूलों की फुलवारी और बलसान 1 की उभरी हुई क्यारियाँ हैं। 1 उसके होंठ सोसन फूल हैं + 5:13 सोसन फूल हैं: सम्भवतः फूलों की सुगन्ध या होठों जैसे घूमी हुई पंखडियां यहाँ उनका रंग नहीं तुलना है। जिनसे पिघला हुआ गन्धरस टपकता है। 1

14उसके हाथ फीरोजा जड़े हुए सोने की छड़ें हैं। 1 उसका शरीर नीलम के फूलों से जड़े हुए हाथी दाँत का काम है। 1

15उसके पाँव कुन्दन पर बैठाये हुए संगमरमर के खम्भे हैं। 1 वह देखने में लबानोन और सुन्दरता में देवदार के वृक्षों के समान मनोहर है। 1

16उसकी वाणी अति मधुर है, हाँ वह परम सुन्दर है। 1 हे यरूशलेम की पुत्रियों, यही मेरा प्रेमी और यही मेरा मित्र है।

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