Psalms 139
1हे यहोवा, तूने मुझे जाँचकर जान लिया है। (रोम. 8:27) 1
2तू मेरा उठना और बैठना जानता है; 1 और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है। 1
3मेरे चलने और लेटने की तू भली भाँति छानबीन करता है, 1 और मेरी पूरी चाल चलन का भेद जानता है। 1
4हे यहोवा, मेरे मुँह में ऐसी कोई बात नहीं 1 जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो। 1
5तूने मुझे आगे-पीछे घेर रखा है + 139:5 तूने मुझे आगे-पीछे घेर रखा है: परमेश्वर उसे चारों ओर से घेरे हुए है वह बचकर जा नहीं सकता।, 1 और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है। 1
6यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; 1 यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है। 1
7मैं तेरे आत्मा से भागकर किधर जाऊँ? 1 या तेरे सामने से किधर भागूँ? 1
8यदि मैं आकाश पर चढ़ूँ, तो तू वहाँ है! 1 यदि मैं अपना खाट अधोलोक में बिछाऊँ तो वहाँ भी तू है! 1
9यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़कर समुद्र के पार जा बसूँ, 1
10तो वहाँ भी तू अपने हाथ से मेरी अगुआई करेगा, 1 और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 1
11यदि मैं कहूँ कि अंधकार में तो मैं छिप जाऊँगा, 1 और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अंधेरा हो जाएगा, 1
12तो भी अंधकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; 1 क्योंकि तेरे लिये अंधियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं। 1
13तूने मेरे अंदरूनी अंगों को बनाया है; 1 तूने मुझे माता के गर्भ में रचा। 1
14मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, इसलिए कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया + 139:14 मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया: भयानक अर्थात् भयभीत करनेवाली बातें जिनसे भय या श्रद्धा उत्पन्न होती है। अद्भुत रीति से रचा गया: का वास्तविक अर्थ है, विशिष्ट: या पृथक:। हूँ। 1 तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, 1 और मैं इसे भली भाँति जानता हूँ। (प्रका. 15:3) 1
15जब मैं गुप्त में बनाया जाता, 1 और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, 1 तब मेरी देह तुझ से छिपी न थीं। 1
16तेरी आँखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; 1 और मेरे सब अंग जो दिन-दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहले 1 तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे। 1
17मेरे लिये तो हे परमेश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! 1 उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है! 1
18यदि मैं उनको गिनता तो वे रेतकणों से भी अधिक ठहरते। 1 जब मैं जाग उठता हूँ, तब भी तेरे संग रहता हूँ। 1
19हे परमेश्वर निश्चय तू दुष्ट को घात करेगा! 1 हे हत्यारों, मुझसे दूर हो जाओ। 1
20क्योंकि वे तेरे विरुद्ध बलवा करते और छल के काम करते हैं; 1 तेरे शत्रु तेरा नाम झूठी बात पर लेते हैं। 1
21हे यहोवा, क्या मैं तेरे बैरियों से बैर न रखूँ, 1 और तेरे विरोधियों से घृणा न करूँ? (प्रका. 2:6) 1
22हाँ, मैं उनसे पूर्ण बैर रखता हूँ; 1 मैं उनको अपना शत्रु समझता हूँ। 1
23हे परमेश्वर, मुझे जाँचकर जान ले! 1 मुझे परखकर मेरी चिन्ताओं को जान ले! 1
24और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, 1 और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुआई कर!