Psalms 51
1हे परमेश्वर, अपनी करुणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; 1 अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे। (लूका 18:13, यशा. 43:25) 1
2मुझे भली भाँति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, 1 और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर! 1
3मैं तो अपने अपराधों को जानता हूँ, 1 और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है। 1
4मैंने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, 1 और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, 1 ताकि तू बोलने में धर्मी 1 और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे। (लूका 15:18,21, रोम. 3:4) 1
5देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, 1 और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा। (यूह. 3:6, रोम. 5:12, इफि. 2:3) 1
6देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; 1 और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा। 1
7जूफा से मुझे शुद्ध कर + 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर: जूफा एक पौधा था जिसका उपयोग इस्राएल में पवित्र शोधन एवं छिड़काव में किया जाता था। , तो मैं पवित्र हो जाऊँगा; 1 मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूँगा। 1
8मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, 1 जिससे जो हड्डियाँ तूने तोड़ डाली हैं, वे 1 मगन हो जाएँ। 1
9अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, 1 और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल। 1
10हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर + 51:10 मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर: यह शब्द वास्तव में सृजन कार्य को दर्शाने के लिए प्रयोग किया गया है, अर्थात् किसी को जो नहीं है अस्तित्व में लाना।, 1 और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। 1
11मुझे अपने सामने से निकाल न दे, 1 और अपने पवित्र आत्मा को मुझसे अलग न कर। 1
12अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, 1 और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल। 1
13जब मैं अपराधी को तेरा मार्ग सिखाऊँगा, 1 और पापी तेरी ओर फिरेंगे। 1
14हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, 1 मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, 1 तब मैं तेरी धार्मिकता का जयजयकार करने पाऊँगा। 1
15हे प्रभु, मेरा मुँह खोल दे 1 तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूँगा। 1
16क्योंकि तू बलि से प्रसन्न नहीं होता, 1 नहीं तो मैं देता; 1 होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता। 1
17टूटा मन + 51:17 टूटा मन: अपराध बोध के बोझ के नीचे दबकर टूटा हुआ अन्त:करण। कहने का अर्थ है कि आत्मा पर इतना अधिक बोझ हो गया कि वह कुचल गई और दब गई। परमेश्वर के योग्य बलिदान है; 1 हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को 1 तुच्छ नहीं जानता। 1
18प्रसन्न होकर सिय्योन की भलाई कर, 1 यरूशलेम की शहरपनाह को तू बना, 1
19तब तू धार्मिकता के बलिदानों से अर्थात् सर्वांग 1 पशुओं के होमबलि से प्रसन्न होगा; 1 तब लोग तेरी वेदी पर पवित्र बलिदान चढ़ाएँगे।