Psalms 4
1हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूँ तब तू मुझे उत्तर दे; 1 जब मैं संकट में पड़ा तब तूने मुझे सहारा दिया। 1 मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले। 1
2हे मनुष्यों, कब तक मेरी महिमा का अनादर होता रहेगा? 1 तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे? (सेला) 1
3यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है + 4:3 यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है: अपने उद्देश्यों के निमित या अपनी योजना के लिए। ; 1 जब मैं यहोवा को पुकारूँगा तब वह सुन लेगा। 1
4काँपते रहो और पाप मत करो; 1 अपने-अपने बिछौने पर मन ही मन में ध्यान करो और चुपचाप रहो। (सेला) (इफि. 4:26) 1
5धार्मिकता के बलिदान चढ़ाओ, 1 और यहोवा पर भरोसा रखो। 1
6बहुत से हैं जो कहते हैं, “कौन हमको कुछ भलाई दिखाएगा?” 1 हे यहोवा, तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका! 1
7तूने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, 1 जो उनको अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता है। 1
8मैं शान्ति से लेट जाऊँगा और सो जाऊँगा; 1 क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को निश्चिन्त रहने देता है।